दूसरों की निन्दा/आलोचना/बुराई न करें


दूसरों की बुराई करना, उनकी निन्दा करना, आलोचना करना जितना आसान है, उतना ही मुश्किल है दूसरों की तारीफ करना। यह मानव स्वभाव है—उसे दूसरों की गलती, उनकी कमियाँ जल्दी दिखाई पड़ती हैं। हालाँकि दूसरों की अच्छाइयाँ दिखाई तो दे जाती है, मालूम भी होता है कि फलाँ-फलाँ व्यक्ति काफी अच्छा है, काफी प्रतिभाशाली है, काफी व्यवहारकुशल है लेकिन हमारा मन इसे स्वीकार करने में काफी अड़चने लगा देता है क्योंकि हमारा मन अपने आपको दूसरों से कमतर मानने के लिए तैयार होता ही नहीं है। परिणामस्वरूप जब किस...

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