Interview Tips- FACING THE INTERVIEW BOARD


During interviews, most of the candidates get butterflies in their tummies. Even the name of interview creates flutter in their minds.

Remember, an interview is nothing but a face to face conversation for a specific purpose. It’s an exercise in effective communication. It’s an exercise to assess your personal suitability for the job and you have to prove it during this exercise. Mind you, No one else can speak in favour of you as effectively as you yourself can. So, take t...

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Essentials of Good Communication


Precision

Be precise in your answers. It is important to express yourself precisely and exactly without beating the bush or being verbose. So avoid long answers which may put you off the track. Give only relevant information and avoid exposing yourself unnecessarily. Do not give monosyllabic answers.

 

Brevity

Brevity in expression effectively villas the attention of the people. Your long answer may get lost in a sea of ve...

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Interview Tips- Points to Remember


1) Do not seem to be excited or nervous.

2) Take a seat when offered.

3) Sit straight but relaxed.

4) Do not cross your legs but keep your feet firmly on the floor, keeping your right foot slightly ahead of the left. This       gives you more support and self confidence.

5) Keep arms in a natural position. Clasping your hands together or crossing your arms indicates your anxiousness.

6) Have proper eye contact with the interviewers a...

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संगत का असर


लगभग पाँच लाख विद्यार्थी युवाम के मार्फत मेरे सम्पर्क में आये हैं। मेरे सम्पर्क में आये इन सभी विद्यार्थियों से मैने कुछ न कुछ अच्छा सीखा है। एक बड़ी सीख जो मुझे मिली जो अब मेरा दृढ़ विश्वास बन चुकी है-वह यह है हम सभी पर संगत का असर जरूर होता है। इससे कोई अछूता नहीं रह सकता। हालांकि कुछ लोग कहते हैं कि उन पर संगत का असर नहीं होता पर मैं दावें के साथ कहता हूँ कि भले ही थोड़े समय के लिए असर न हो लेकिन दीर्घकाल में असर अवश्य होता है।

 

दोस्तों मैं कहना चाहूँगा कि भेड़-बकरियो...

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‘पहचान’ पाने की लालसा


हाल ही में किसी कार्य वश मेरा एक विश्वविद्यालय जाना हुआ। विश्वविद्यालय का सीधा सा मतलब उच्च शिक्षा का केन्द्र, लेकिन वहाँ मुझे कुछ अलग ही अहसास हुआ। ऐसा लगा जैसे मैं किसी बहुत बड़े व्यवसायिक स्थान पर आया हूँ। अधिकाँश छात्र महँगे एवं फैशन वाले कपड़े पहने हुए थे। अधिकाँश छात्राएँ महँगे गारमेंट्स के अलावा नवीनतम प्रकार की महँगी ज्वैलरी धारण किए हुए थी। कुछ छात्रों ने अपने सिर के बाल कलर किए हुए थे तथा विभिन्न प्रकार की हेयर स्टाइल धारण किए हुए थे। यही नहीं कुछ छात्रों ने तो दाढ़ी रखने के तरीके भ...

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‘सराहे’ जाने की लालसा


यह बात उस समय की है जब मेरी छोटी बेटी दूसरी कक्षा में पढ़ती थी और लगभग सात वर्ष की थी। एक दिन उसकी क्लास टीचर ने अच्छा होमवर्क करने पर उसकी नोटबुक में ‘Very Good’ (वेरी गुड) लिख दिया। वह बहुत खुश होकर घर आयी और आते ही अपनी मम्मी को बताया कि देखो उसको आज होमवर्क में वेरी गुड मिला। जब तक उसने घर में एवं आस-पड़ोस में रहने वाले सबको नहीं बताया तब तक खाना भी नहीं खाया। यही नहीं शाम सात बजे तक मेरे आने का बेसब्री से इंतजार करती रही। जैसे ही मैंने घर के बाहर आकर स्कूटर रोका तो वह तुरन्त...

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‘महत्त्व’ पाने की लालसा


प्रत्येक व्यक्ति अपने आपको महत्त्वपूर्ण ही नहीं बल्कि ‘अत्यन्त महत्त्वपूर्ण व्यक्ति’ (Very Important Person, VIP) समझता है, यानि प्रत्येक व्यक्ति में ‘महत्त्व’ पाने की जन्मजात तीव्र लालसा होती है। कोई भी व्यक्ति इसका अपवाद नहीं है।

 

आइये मैं आपको वास्तविक जीवन के कुछ उदाहरण बताता हूँ :

 

मान लीजिये आप अपने दोस्तों या परिवार के सदस्यों के साथ ग्रुप फोटो खिंचवाते है। जब यह ग्रुप फोटो तैयार होकर आपके पास आता है तो आप ग्रुप में सब...

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मानव स्वभाव को समझें


मेरी आयु उस वक्त 7 या 8 वर्ष की थी। हमारे घर में उस वक्त दूध हेतु एक गाय रखी हुई थी। मैं देखता था कि गाय का दूध दुहने से पहले मेरी माँ आधा-एक घंटे तक गाय की पीठ को सहलाती थी, खाज करती थी, पीठ को थपथपाती थी, दूध निकालने से पहले कुछ न कुछ अच्छा चारा खिलाती थी, बछड़े को गाय की आँखों के समाने खड़ा रखती थी। यह सब होने पर गाय बड़े आराम से दूध देती थी।

सोचिये एक जानवर से कुछ पाने के लिए हमें उसे स्नेह, दुलार, पोषण आदि देना पड़ता है तो इन्सान से डांट-डंपटकर कुछ पा सकते है क्या? नहीं।

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इंसान की तीव्र लालसायें


मेरा सबसे घनिष्ठ मित्र है चन्द्रशेखर। उसकी शादी के लगभग एक वर्ष बाद की बात है। मैं उसके घर उससे मिलने गया। वह घर पर नहीं था। अपनी पत्नी के साथ बाजार में कुछ खरीदने गया था। घर से गये लगभग 4-5 घंटे हो चुके थे और अब रात्रि के 9 बजने वाले थे। जब में उसके घर गया तो केवल अम्मा जी (चन्द्रशेखर की माताजी) ही थी। हमेशा हँसमुख रहने वाली अम्माजी उस दिन बड़ी ही खिन्न दिखाई दे रही थीं। जब मैंने चन्द्रशेखर के बारे में पूछा कि चन्द्रशेखर कहाँ गया है? कब तक वापस आयेगा? किस काम से बाहर गया है? तो अम्माजी के खि...

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जीवन में करोड़ों की बीड़ी/सिगरेट पी जाते हैं


हाल ही में मैं एक गाँव में लगभग 60 वर्षीय बुजुर्ग से मिला। बातों ही बातों में उन्होंने अपनी खराब आर्थिक स्थिति का वर्णन करना शुरू कर दिया। गरीबी के कारण बुढ़ापे में अत्यन्त मुसीबत हो रही है। दो वक्त की रोटी मिलना भी मुश्किल हो गया है। बात करते जा रहे थे एवं लगभग आधा घंटे में ही दो बीड़ी पी चुके थे। जब उनकी खराब आर्थिक स्थिति का सुना तो मैंने पूछ लिया कि युवा अवस्था में अपने बुजुर्ग अवस्था के लिए बचत क्यों नहीं की, तो कहने लगे कि कुछ भी पैसा बचता ही नहीं था।

 

अब जरा ध्यान...

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